हर्निया क्या होता है ? इसका कारण क्या होता है ? तथा इसका इलाज कैसे करे ? और इस बिमारी को ठीक करने में कोन से मेडिसिन की जरुरत होती है ? इन सभी का जवाब इस पोस्ट में दी गयी है ! आमतौर पर, हर्निया में पेट या आंत शामिल होती हैं! लक्षणों में उभार, सूजन, या दर्द शामिल हैं. कुछ मामलों में, कोई लक्षण दिखाई नहीं देता!उपचार में स्थिति की निगरानी शामिल है! आवश्यकता पड़ने पर शल्य चिकित्सा के द्वारा ऊतक अपने सामान्य स्थान पर लौट सकता है और छिद्र बंद हो सकते हैं!
आन्त्रवृद्धि या हर्निया Inguinal Hernia
पेट पर दबाव पड़ने या वंक्षण प्रदेश (inguinal region) की मांसपेशियों के कमजोर होने से आंत का कुछ हिस्सा पेट के निचले हिस्से या कभी-कभी पुरुषों के अंडकोष में उतर जाता है इसे वंक्षण आंत्रवृद्धि या इंगुइनल हर्निया (Inguinal hernia) कहते हैं
इंगुइनल हर्निया का ट्रीटमेंट
बीमारी की शुरुआती अवस्था में सपोर्टिंग अंडर गारमेंट्स पहनने से कुछ आराम मिल जाता है लेकिन अगर लक्षण सूजन दर्द आदि ज्यादा है तो शल्य क्रिया द्वारा इसका ट्रीटमेंट किया जाता है
प्रारम्भिक उपचार - सर्वप्रथम बिस्तर पर रोगी को चित्त पीठ के बल लिटा दें। तदुपरान्त उसकी कमर के नीचे एक पतला तकिया रखकर कमर और पेट ऊँचे तथा छाती और माथा नीचे कर दें। अब वक्षण प्रदेश से जांघ या अण्डकोष तक शोथ (सूजन) युक्त भागों पर अंगुलियों से मुलायम एवं हल्के रूप से धीरे-धीरे दाब देकर उतरे आंत को वंक्षण सुरंग (Inguinal Canal) होकर भीतर प्रदेश में ले आयें। आंत भीतर/अंदर जाते समय “गड़गड़” की आवाज सुनाई देगी। इस प्रकार आंत यदि सरलतापूर्वक अंदर न जाये तो सूजे हुए स्थानों में "आइस बैग" (बर्फ की थैली) रख दें। यदि फिर भी आंत अंदर प्रविष्ट न हो तो तुरन्त गर्म जल का एनिमा लगायें। ऐसा करने से दस्त होकर वायु निकलते ही आंत अंदर चली जाती है।
- यदि आंत दबा देने पर अपने स्थान पर आ जाए तो ऐसे रोगी को उसके साइज की पेटी/बैल्ट (हार्निया ट्रस Harnia Truss) प्रयोग करायें। आंत को प्रथम अपने स्थान पर दबा दें, तदुपरान्त पेटी/बैल्ट लगा दें। इसके लगाने से आंत अपने स्थान पर रहेगी और नीचे नहीं उतरेगी।
- आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (एलोपैथी) में इसकी सर्वोत्तम चिकित्सा शल्यकर्म (ऑप्रेशन) है। काम्बीनेशन थैरापी सर्वप्रथम 15 से 25 ग्राम मैग सल्फ (मैग्नेशियम सल्फेट Magnesium Sul- phate) 100 से 200 मिली० पानी में मिलाकर पिलायें जिससे 1-2 दस्त आकर आंतें साफ हो जाएं। तब आंत को ऊपर अपने स्थान पर चढ़ाकर उपयुक्त साइज की 'हार्निया ट्र्स' (बेल्ट/पेटी) पहना दें।
- ट्राइफोलैक्सिन (Trifolaxin) निर्माता-स्टैण्डर्ड। टेबलेट+पेण्टिड्स (Pentids) निर्माता-साराभाई पीरामल। टेबलेट 1 मात्रा। ऐसी एक-एक मात्रा पानी से हल्के भोजन के बाद दिन में 3 बार दें।
- अल्माकार्ब (Almacarb) निर्माता-ग्लैक्सो स्मिथ क्लाइन। कुछ दिनों तक निरन्तर हार्निया में आराम लाने के लिए इसकी 2 टेबलेट दिन में 3-4 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करायें ।
- पूर्ण लाभ के लिए सर्जिकल ऑप्रेशन करायें। अन्य उपयोगी औषधियाँ
- रिफ्लक्स टेबलेट (Riflux) निर्माता रैड्डीज लैब० आवश्यकतानुसार 2 से 4 टेबलेट दोपहर व रात को भोजनोपरान्त रोगी को चबा लेने हेतु निर्देशित करें ऊपर से आधा गिलास पानी पिलायें ।
- लॉमैक कैपसूल (Lomac) निर्माता- सिपला 1 कैपसूल प्रतिदिन पानी के साथ सेवन करायें।
- डाइजीन जेल (Digene Gel) निर्माता-नोल । आवश्यकतानुसार 1 से 4 टिकिया प्रत्येक भोजन के बाद तथा रात को सोते समय जल से सेवन करायें ।
- सिमेको टेबलेट (Simeco) निर्माता-वाइथ लेडरले । 1 से 2 टिकिया 4 बार जल से दें।
- इम्बेसिल टेबलेट (Embesil) निर्माता-निकोलस। 1-2 टिकिया प्रत्येक भोजन के बाद तथा रात को सोते समय आवश्यकतानुसार सेवन करायें।
- म्यूकेन सस्पेंशन (Mucaine) निर्माता-वाइथ लेडरले 1 से 2 छोटे चम्म भोजन से 15 मिनट पूर्व और रात को सोते समय दिन में 4 बार सेवन करायें।
- अल्ट्राकेन जेल (Ultracaine Gel) निर्माता- ब्लूक्रोस। संस्पेंशन 5 मिली० भोजन के बाद अथवा जब कष्ट हो तो दिन में 2-3 बार सेवन करायें। • एसिलॉक इंजेक्शन (Aciloc) निर्माता-कैडिला 2 मिली० (50 मिग्रा०) प्रत्येक 6 से 8 घंटे बाद या 1 मिली० (25 मिग्रा०) प्रति घंटे के हिसाब से 2 घंटे तक धीरे-धीरे शिरा में इंजेक्शन प्रत्येक 6-8 घंटे बाद लगायें। सावधानी - औषधि की एलर्जी में प्रयोग निषेध है।
- पेरिनार्म इंजेक्शन (Perinorm) निर्माता-इपका । 2 मिली० का नितम्ब के गहरे मांस में प्रतिदिन इंजेक्शन लगायें।
- स्पास्मोप्रोक्सीवॉन इंजेक्शन (Spasmoproxivon) निर्माता-वाकहट 1 से 2 मिली० का मांस में आवश्यकतानुसार दिन में 3-4 बार इंजेक्शन लगायें ।
- मैक्सेरोन इंजेक्शन (Maxeron) निर्माता- वालेस । 2 मिली० (10 मिली०) गहरे मांस में प्रतिदिन इंजेक्शन लगायें ।

