गठिया (आर्थराइटिस): लक्षण, कारण, उपचार, प्रक्रिया, कीमत और दुष्प्रभाव | Arthritis

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आर्थराइटिस के उपचार में नीचे लिखी विधियों का प्रयोग किया जाता है-

फिजियोथैरेपी

  • रोग के अवस्था के अनुकूल उन्हें कुछ विशेष व्यायाम कराये जाते हैं, ताकि प्रभावित भाग की सक्रियता कायम रखी जा सके तथा रोगी को आराम मिले।
  • शोथ नाशक (एण्टीइन्फ्लेमेटरी) तथा दर्द निवारक (एनालजैसिक्स) औषधियों का प्रयोग रोगी की दशा/हालत में सुधार लाने के लिए किया जाता है। (कुछ प्रमुख औषधियों यथा—डाइक्लोफेनिक सोडियम पिरोक्सीकेम, इण्डोमेथासिन, निसूसुलाइड, इबूप्रोफेन आदि हैं।)

हीट थैरेपी

इसमें दो प्रकार की हीट थैरेपी अपनाई जाती है-

  1. मोइस्टहीट थैरेपी (गोली सिकाई)।
  2. ड्राईहीट थैरेपी (सूखी सिंकाई ) ।

शारीरिक भार/ वजन नियंत्रण

किसी भी प्रकार के उपचार के साथ रोगी के शारीरिक भार (वजन) पर नियंत्रण (कण्ट्रोल) रखना अत्यावश्यक है।यदि किसी भी प्रकार की चिकित्सा से जोड़ों को फिर से स्वस्थ बनाना संभव न हो पाये तो उनको मैटल अथवा सिलीकोन के बने कृत्रिम जोड़ों से बदलना आवश्यक हो जाता है।

पायोजीनिक सन्धिशोथ/Pyogenic Arthritis:-

  1. रोगी को पूर्ण विश्राम करने का परामर्श दें।
  2. रोगी को पौष्टिक भोजन दें।
  3. बैक्टीरिया के अनुसार रोगी को एण्टीबायोटिक दें।
  4. सन्धि / जोड़ को प्लास्टर का सहारा देकर रखें, ताकि उस पर जोर न पड़े।
  5. मवाद अथवा द्रव को विसंक्रमित सुई से अथवा चीरा लगाकर निकाल दें।
  6. रोगी को 'दर्द निवारक' तथा 'एण्टीबायोटिक' औषधि दें।
  7. ठीक होने पर रोगी को हल्का व्यायाम करने का परामर्श दें।

रुमेटायड सन्धिशोथ/Rheumatoid Arthritis:-

  • रोगी की उचित देखभाल करें तथा पूर्णविश्राम करायें।

औषधियाँ :-

  • जोड़ (सन्धि) में इन्जेक्शन लगाना ।

फिजियोथेरेपी

  1. शल्यक्रिया (ऑपरेशन)
  2. रोगी को रोगारम्भ के समय आराम (Rest) का परामर्श दिया जाता है। जोड़ों में अधिक दर्द और शोथ (सूजन) होने पर खपच्ची लगाकर सहारा दिया जाता है। इस दौरान रोगी को पौष्टिक, लघु-पाच्य भोजन लेने हेतु आदेशित करें। रोगी को कष्ट अधिक होने पर अस्पताल में भर्ती करायें।
  3. औषधियाँ - रोग के आरम्भ में ही दर्द व सूजन के लिए औषधियाँ आरम्भ कर देनी चाहिए-

 आइबूप्रोफेन (Ibuprofen)

टेबलेट ब्रफेन (Brufen) निर्माता-अब्बोट । यह 200, 400 व 600 मिग्रा० में उपलब्ध है। यह औषधि टेबलेट, कैपसूल और सीरप के रूप में (इबूप्रोफेन) बाजार से विभिन्न पेटेण्ट व्यवसायिक नामों से प्राप्य है। मात्रा - (वयस्क) 400-800 मिग्रा० 3 बार प्रतिदिन ।

अन्य समकक्ष औषधियाँ

  1. आइबूजेसिक टेबलेट, सस्पेंशन (Ibugesic) निर्माता- सिपला ।
  2. इन्फ्लापेन सी०आर० कैपसूल (Inflapen) निर्माता -जी०एस०के० ।
  3. प्रिमोबिल कैपसूल, सस्पेंशन (Premobil) निर्माता - बायो० इवान्स ।
  4. एस्पिरिन (Aspirin) मात्रा - 50-100 मिग्रा० प्रतिदिन आवश्यकतानुसार।

कुछ प्रमुख पेटेण्ट व्यवसायिक उत्पादन

  1. टेबलेट एस्पिरिन (Aspirin) निर्माता-जर्मन रेमेडीज।
  2. टेबलेट कोलस्प्रीन (Colsprin) निर्माता रैकिट इण्डिया।
  3. टेबलेट ई० प्रीन (E. Prin) निर्माता-एल्डर ।
  4. टेबलेट जोस्प्रीन (Zosprin) निर्माता-मेडले ।

पाइरोक्सी कैम (Piroxicam)

यह औषधि टेबलेट, कैपसूल, इन्जेक्शन, जैल तथा क्रीम के रूप में विभिन्न पेटेण्ट व्यवसायिक नामों से बाजार में प्राप्य है। इसकी वयस्क मात्रा - (मुख द्वारा) 20 मिग्रा० 2 बार प्रतिदिन (इन्जेक्शन) 20-40 मिग्रा० मांसान्तर्गत (I/M) प्रतिदिन 1 बार 5-7 दिन ।
सावधानी– गर्भावस्था, दुग्धावस्था तथा 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों में औषधि प्रयोग निषेध है।

  1. डोलेनेक्स टेबलेट, कैपसूल (Dolonex) निर्माता - फाईजर |  
  2. मोवोन-20 टेबलेट, कैपसूल (Movon-20) निर्माता - इपका ।
  3. पेरीकेम कैपसूल 10, 20 मिग्रा० (Pericam) निर्माता-जेडुस काडिला ।
  4. पाइरोक्स टेबलेट, कैपसूल, इन्जेक्शन (Pirox) निर्माता- सिपला ।
  5. सुगानरिल टेबलेट (Suganril) निर्माता- निकोलस ।

इण्डोमेथासिन (Indomethacin)

यह टेबलेट, एस०आर० टेबलेट तथा कैपसूल के रूप में विभिन्न पेटेण्ड व्यवसायिक नामों से बाजार में उपलब्ध है। इसकी वयस्क मात्रा - 25 मिग्रा० 2-3 बार अथवा 75 मिग्रा० 1 बार प्रतिदिन है।

कुछ प्रमुख पेटेण्ट व्यवसायिक उत्पादन

  1. इण्डोकैप टेबलेट एस०आर० टेबलेट (Indocap) निर्माता - जगसनपाल।
  2. इण्डोसिड एस०आर० कैपसूल (75 मिग्रा०) (Indosid SR) निर्माता-सिपला।
  3. माइक्ररोसिड टेबलेट एस०आर० टेबलेट (Microcid) निर्माता-माइक्रो लैब० । 
  4. इण्डोफ्लेम टेबलेट, एस॰आर टेबलेट (Indoflam) निर्माता-रेकोन हैल्थकेयर ।

नोट:- जब शोथ व दर्द निवारक औषधियाँ प्रभाव नहीं करती तब कुछ रोगियों में गोल्डसाल्ट तथा पेनिसिलामाईन का भी प्रयोग करना पड़ता है।

कार्टिकोस्टीरॉयड्स (Corticosteroids)

रोगी की स्थिति अधिक खराब होने पर अन्य औषधियों के साथ 'स्टेरायड्स' देते हैं, परन्तु इसके हानिकर प्रभाव को देखते हुए इनके प्रयोग में सावधानी अपेक्षित है। जोड़ / सन्धि में इन्जेक्शन लगाना-रोग को कम करने के लिए जोड़ में 'हाइड्रोकार्टिसोन' का इन्जेक्शन लगाते हैं।

फिजियोथेरेपी -

  •  गर्म जल की सेंक, इन्फ्रारेड और शार्टवेव डाइथर्मी से सिकाई आराम करती है।
  • रोगी के जोड़ों की वर्जिश (व्यायाम) अवश्य करवायें, अन्यथा जोड़ अकड जाते हैं। 

शल्यकर्म (ऑपरेशन ) -

  1. ऑप्रेशन करके मोटी हुई सायनोवियल मेम्ब्रेन को निकाल देते हैं।
  2. इसके द्वारा जोड़ को बचाने का प्रयास किया जाता है।

ट्यूबरक्युलस सन्धिशोथ (Tuberculous Arthritis)

  • रोगी को पूर्ण विश्राम करायें। 
  • प्रभावित सन्धि को सहारा देना ।
  • प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन दें।

रोगी को नीचे लिखी औषधियाँ देनी चाहिए ।

  1. रिफेम्पीसिन (Rifampicin)।
  2. आइसोनियाजाइड (Isoniazide)। 
  3. पायरीजिनामाइड (Pyrazinamide)
  4. इथाम्बुटोल (Ethambutol)।
जोड़ में संक्रमण के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन (Streptomycin) 1 ग्राम प्रयोग करना चाहिए।
  1. औषधियों का कोर्स 6-12 माह तक चलता है।
  2. औषधियाँ देने पर मवाद धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है।
  3. औषधियाँ रोग के आरम्भ में ही देने पर 'जोड़' बिल्कुल ठीक हो सकता है, अन्यथा कार्टिलेज और हड्डी में परिवर्तन आने से जोड़ खराब हो जाता है।
  4. इस रोग में Healing, Fibrosis के साथ होती है। इस कारण से विलम्ब किये जाने के अवस्था में जोड़ सदैव के लिए खराब हो सकता है।
  5. दर्द के लिए कोई भी दर्द निवारक (एनालजैसिक) औषधि दे सकते हैं।
  6. अधिक सूजन होने पर आरम्भ में स्टेरायड्स दे सकते हैं।

विशेष नोट:- किसी भी सन्धि/जोड़ के लिए औषधियाँ एक जैसी ही होती हैं।

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