ओस्टियोमाइलाइटिस क्या है /What is Osteomyelitis?
आमतौर पर पैरों, बांह और रीढ़ में संक्रमण से होने वाली हड्डी की सूजन, संक्रमण रक्त प्रवाह या पास के ऊतक से फैलकर हड्डियों तक पहुंच सकते हैं! सामान्य लक्षणों में दर्द, बुखार, और ठंड लगना शामिल हैं! इलाज में आमतौर पर हड्डी के मृत भागों को ऑपरेशन से निकालना शामिल है. इसके बाद कम से कम छह सप्ताह तक, तेज़ एंटीबायोटिक दवाएं, अक्सर शिरा (नस) के ज़रिए ली जाती हैं.
ओस्टियोमाइलाइटिस में क्या करे ?
- रोगी को पूर्ण विश्राम (कम्पलीट रैस्ट) करायें।
- रोगी को पौष्टिक आहार (रिच-डाइट) दें।
- रोगी को अन्य रोगों से बचायें।
- रोगी को जल्द से जल्द एण्टीबायोटिक देना चाहिए-यथा क्लोक्सासिलीन (Cloxacillin) या इरिथ्रोमाइसिन (Erythromycin) 500 मिग्रा०+ फ्यूसिडिक एसिड (Fusidic Acid) एक साथ देनी चाहिए।
विशेष-
- पीप/मवाद (Pus) की जाँच के बाद उसके अनुसार एण्टीबायोटिक औषधि देनी चाहिए।
- रोगी के दर्द व शोथ को दूर करने के लिए दर्द निवारक और एण्टीइन्फ्लामेटरी औषधि देनी भी आरम्भ करनी चाहिए।
- रोगी को ताकत/शक्ति के लिए साथ में बी०काम्पलेक्स कैपसूल दिन में 2 बार सेवन कराना चाहिए।
- पीव/मवाद को निकालने के लिए हड्डी में ड्रिल द्वारा 1 या 2 छिद्र (सूराख) कर देना चाहिए। (मवाद निकल जाने से हड्डी खराब नहीं होती है।)
- ऑप्रेशन के द्वारा Sequestrum को निकालकर मवाद निकलने हेतु मार्ग/रास्ता बना देना चाहिए।
- खराब हड्डी की शल्यक्रिया (ऑप्रेशन) के समय छिलाई कर दें।
- पुराने नासूर (साइनस) को भी ऑप्रेशन के द्वारा निकाल दें।
- सड़ा-गला गन्दा मांस भी निकाल दें।
- रिक्त/खाली स्थान (कैविटी Cavity) को भरने के लिए मांसपेशी का फ्लेप लगाया जाता है।

