सर्पदंश होने के बाद कैसे इलाज करे /Snakebite Treatment

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दोस्तों इस पोस्ट में बताया गया है की सर्पदंश होने के बाद कैसे इलाज करे? तथा कितने तरह के जहरीला साप होता है ? और इसका इलाज कैसे करे ताकि मरीज का जान बच जाये ! 

सर्पदंश में क्या करना चाहिए ?

सर्पदंश की चिकित्सा शीघ्रतिशीघ्र करनी चाहिए, अन्यथा इससे होने वाले उपद्रव रोगी की मृत्यु तक का कारण बन जाते हैं। सर्प दंश के विष से अधिक कभी- कभी इसके भय से अधिक परेशानी होती है। इसलिए रोगी की अनावश्यक चिन्ता, आशंका तथा भय का निवारण करना चाहिए।

  1. रोगी को हिलने-डुलने न दें। उसको आराम पूर्वक लिटायें रखें। 
  2. दांर्शत स्थान पर विसंक्रमित चाकू या ब्लेड से घाव बनाकर विष मिश्रित निकाल देना चाहिए। या लाल दवा से भलीप्रकार धोकर हेथेरोनाइड मरहम लगायें।
  3. दंशित स्थान के ऊपर टूर्नीकेट कसकर बांध देना चाहिए तथा प्रत्येक 10-15 मिनट के अन्तराल पर इसे कुछ सेकण्ड के लिए ढीला करते रहना चाहिए।
  4. घाव को नार्मल सेलाइन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
  5. यदि रक्त संचार में कमी हो तो कोर्टिकोस्टीरायड ग्रूप की औषधियों का प्रयोग करना

सर्प विष के लिए उसका प्रतिविष सेण्ट्रल रिसर्च इन्स्टीटयूट कसौली द्वारा 'पोली वेलेण्ट एण्टी वेनिन' निर्मित किया जाता है जो भारतवर्ष में पाये जाने वाले अधिकांशता सर्प विष के प्रतिविष के रूप में काम में आता है। यह कमरे के तापमान पर स्थायी नहीं रहता है। अतः फ्रिज में रखना चाहिए। यह पाउडर रूप में होने के कारण प्रयोग में लाने से पूर्व तैयार किया जाता है। इस हेतु डिस्टिल्डवाटर (परिश्रुत जल) प्रयोग में लाया जाता है। प्रतिविष का प्रयोग करने से पूर्व रोगी की उसके प्रति संवेदनशीलता की परीक्षा कर लेनी चाहिए। यदि रोगी में 'एलर्जी' का पूर्व इतिहास हो अथवा प्रति विष । पहले दिया जा चुका हो तो इन्जेक्शन बेटनेसोल (Betnesol) निर्माता-ग्लैक्सो स्मिथ क्लाइन 4 मिग्रा० मांसपेशीय में (I/M) दे देना चाहिए। पूर्व औषधि के रूप में एड्रीनालीन। 1: 1000 का 0.25 मिली० का इन्जेक्शन त्वचा में तथा इन्जेक्शन एविल (Avil) 2 मिली० का मांस पेशी में (I/M) देना चाहिए।

एक वयस्क रोगी को पोली वेलेन्ट एण्टीबेनिन की प्रथम मात्रा 60 मिली० देते हैं, जिसमें 20 मिली० स्थानीय रूप से दंश स्थान पर त्वचा में.20 मिली० मांसपेशी में (I/M) तथा 20 मिली० शिरा/नस में (IV) में देते हैं। यदि लक्षणों में कमी न आ रही हो तो 20-100 मिली० एण्टीबेनन को 2-3 लीटर आइसोटोनिक सेलाइन में मिलाकर 15 बूंद प्रतिमिनट के हिसाब से दें।

सावधानियाँ-

  • प्रतिविष का प्रयोग तभी करना चाहिए जब दंश की विषाक्तता के लक्षण स्पष्ट हो अन्यथा हानि हो सकती है। क्योंकि 'प्रतिविष' स्वयं विषाक्तता का कारण बन जाता है।
  • कोबरा दंश में' नियोस्टिग्मीन-एड्रोपीन चिकित्सा तथा 'वाइपर दंश में 'फाइबीनोजन' के साथ हिपेरिन का प्रयोग करना चाहिए।
  • सर्प के मुख में 'ग्राम नेगेटिव पैथोजन' होते हैं। इसके बचाव के लिए उचित 'ब्राडस्पेक्ट्रम एण्टीबायोटिक' दे ।
  • इन्जेक्शन टेटेनस टॉक्साइड 0.5 मिली० मांसपेशी में दें।

दर्द निवारणार्थ- एस्प्रिन आदि का प्रयोग करें। पहले 24 घण्टे में तीव्र दर्द के लिए मेप्रीडीन हाइड्रोक्लोराइड और कोड़ीन फास्फेट प्रयोग में लाते हैं।

वाइपर दंश में- 'डायजीपाम' प्रयोग में ला सकते हैं। 

सावधानी - कोबरा दंश में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

  • यदि रक्त जमने में दिक्कत है तो इन्जेक्शन हिपेरिन 100-150 यूनिट प्रति किग्रा भारानुसार शिरान्तर्गत (I/V) दें। तदुपरान्त आवश्कयता पड़ने पर रक्त चढ़ायें
  • इंजेक्शन डेक्सामेथासोन 16-32 मिग्रा० प्रतिदिन शिरान्तर्गत (IV) दें। तदुपरान्त आवश्यकता पड़ने पर रक्त चढ़ायें।
  • इन्जेक्शन नियोस्टिग्मीन 0.5 मिग्रा० शिरान्तर्गत (IV) प्रत्येक आधा घण्टे के अन्तराल पर 5 खुराक दें। तदुपरान्त रोगी के लक्षणों के अनुसार दें।
  • 'नियोस्टिग्मीन' देने से पूर्व इन्जेक्शन एट्रोपीन 0.6 मिग्रा० अवश्य दें।
  • रोगी को आई०वी० फ्लूइड दें तथा 24 घण्टे के बाद ही मुख द्वारा तरल पदार्थ देना आरम्भ करवा दें।

विशेष स्मरणीय

  1. नाग विष की घातक मात्रा - 15 मिग्रा० होती है।
  2. वाइपर विष की घातक मात्रा - 40 मिग्रा० होती है।
  3. नागदंश में कुछ घण्टों में, वाइपर दंश में कुछ दिनों में रोगी की मृत्यु हो जाती है। इसलिए रोगी को जल्द से जल्द सुविधा सम्पन्न अस्पताल/चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
  4. रोगी को सोने न दें।

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