गाउट क्या होता है?/ What is gout?
- गठिया का एक प्रकार जिसके लक्षणों में अत्यंत तेज़ दर्द, लालिमा और जोड़ों में दर्द शामिल हैं.
- जब जोड़ों में बहुत ज्यादा यूरिक एसिड क्रिस्टल के रूप में जमा हो जाता है तो दर्द और सूजन पैदा हो जाती है.
- गठिया के लक्षणों में अत्यंत तेज़ दर्द, जोड़ों विशेषकर अंगूठे में लालिमा और सूजन शामिल हैं. इसका दौरा कभी भी पड़ सकता है, विशेषकर रात में.
- गंभीर आघात के दौरान, शोथरोधी दवाएं (NSAID) दर्द को कम करने और आघात की अवधि को छोटा करने में मदद कर सकती हैं. आहार, व्यायाम और शराब का कम सेवन जैसे व्यवहार संबंधी सुधार पुराने गठिया वाले मरीजों में आघात की आवृत्ति कम करने में मदद कर सकते हैं. इसके अलावा पुराने गठिया के रोगियों को अक्सर यूरिक एसिड का स्तर कम करने के लिए दवा दी जाती है.
- रोगी को बिस्तर पर विश्रामपूर्वक लिटाकर रखें।
- जोड़ों में दर्द होने पर सहारे के लिए कुशा (Splint) लगायें।
- खाने में ऐसी चीजें खाने के लिए निषेध करें जिनसे 'यूरिक एसिड' बनता है । रोगी को भोजन में बहुत अधिक प्रोटीन की चीजें (यथा- पनीर, मांस-मछली, अण्डे, दूध आदि) न दें।
- क्षारीय मिश्रण (Alkaline Mixture) न दें।
रोग आक्रमण होने पर रोगी को नीचे लिखी औषधियों दें-
- टेबलेट इण्डोकैप (Indocap) इण्डोमेथासिन (Indomethacin) निर्माता-जगसन पाल ।
- टेबलेट इण्डोफ्लेम (Indoflam) निर्माता-रेकोन हैल्थकेयर ।
- कैपसूल इण्डोसिड एस०आर० (Indosid-SR) निर्माता- सिपला ।
- कैपसूल इनोसिन (Inocin) निर्माता-बाम्बे टेबलेट।
- टेबलेट माइक्रोसिड (Microcid) निर्माता - माइक्रो लैब०
- कैपसूल आसिड (Artisid) निर्माता-सन्
- कैपसूल आईडीसिन (Idicin) निर्माता-आई०डी०पी०एल० । मात्रा - 25 मिग्रा० 2-3 बार अथवा 75 मिग्रा० 1 बार नित्य ।
सावधानियाँ-
उच्च रक्तचाप व हृदयविकार के रोगियों में औषधि सावधानी से दें। (यह औषधि रियूमेटायड आर्थराइटिस, ओस्टियो आर्थराइटिस, तीव्र गठिया, पेशी कंकाल तन्त्र के अन्य विकारों में उपयोगी है।)
- सुरेक्ट (Suract) इन्डोमेथासिन+पैरासिटामोल-कैपसूल,निर्माता-सोल (उचित मात्रा में दें।) टेबलेट 50 मिग्रा०, S.R. टेबलेट 75 मिग्रा०, 100 मिग्रा० इन्जेक्शन 75 मिग्रा0/3 मिली वोवेरान (Voberan) निर्माता-नोवार्टिस (मात्रा - 50 मिग्रा० 2-3 बार प्रतिदिन ।)
- डाइक्लोफिनेक (Diclofenac) के अन्य व्यवसायिक उत्पादन
- टेबलेट, इन्जेक्शन डाइक्लोमेक्स (Diclomax) निर्माता-टोरेण्ट
- टेबलेट, इन्जेक्शन डिक्लोनेक (Diclonac) निर्माता- लूपिन
- टेबलेट, इन्जेक्शन डाइक्लोमोल (Diclomol) निर्माता-विन मेडिकेयर
- टेबलेट, इन्जेक्शन एस्जीपायरिन (Esgipyrin) निर्माता-निकोलस पीरामल ।
- टेबलेट, इन्जेक्शन रियेक्टीन (Reactine) निर्माता- सिपला
कोल्चीसिन (Colchicine) इसका उपयोग तीव्र गठिया, जीर्ण (क्रोनिक) गठिया में होता है। यह औषधि टेबलेट के रूप में विभिन्न व्यवसायिक नामों से बाजार में उपलब्ध है। इसकी वयस्क मात्रा 0.5 मिग्रा० 2-3 बार प्रतिदिन है। यह मात्र गाऊट (गठिया) से उत्पन्न सूजन को कम करती है। (यह न तो दर्द निवारक है और न ही एण्टीइन्फ्लामेटरी) गठिया का आक्रमण/अटैक होने पर इसको तुरन्त देना चाहिए। आरम्भ में 1 मिग्रा० सेवन करायें। तदुपरान्त 0.25 मिग्रा० प्रत्येक 3 घंटे में (जब तक रोग का आक्रमण दूर न हो जाये अथवा रोगी को दस्त न आरम्भ हो जाये।) इसको 4 से 5 बार देना चाहिए। अधिकतम मात्रा - 10 मिग्रा० प्रतिआक्रमण ।
सावधानियाँ-
- गर्भावस्था, दुग्धावस्था तथा बाल्यावस्था में औषधि उपयोग निषेध है।
- इस औषधि को लगातार लम्बे समय तक न दें, अन्यथा रक्त में खराबी आ जाती है।
व्यवसायिक पेटेण्ट उत्पादन:-
- टेबलेट एलोरिक (Aloric) निर्माता इण्टास
- टेबलेट कोल्मिन डोन (Colmindon) निर्माता - इण्डोन ।
- टेबलेट गाऊटनिल (Gautnil) निर्माता-इंगा।
- टेबलेट जायलोरिक (Zyloric) निर्माता-ग्लैक्सो स्मिथ क्लाइन। -गठिया के जीर्ण (पुराने) रोगियों में जिनमें यूरिक एसिड रक्त में लगातार अधिक बना रहता हो उन्हें नीचे लिखी दो प्रकार की औषधियाँ दे सकते हैं-
1. एलोप्यरीनोल (Allopurinol)
यह औषधि टेबलेट के रूप में विभिन्न पेटेण्ट व्यवसायिक नामों से बाजार में उपलब्ध है। इसका उपयोग - तीव्र गठिया, जीर्ण गठिया, हाइपर यूरीसीमिया, रक्त में यूरिक एसिड की अधिकता तथा कालाजार ज्वर में किया जाता है। इसकी मात्रा - (वयस्क) 200 मिग्रा० 3-4 बार प्रतिदिन । ( बच्चे) – (6-10 वर्ष) - 100 मिग्रा० 2-3 बार प्रतिदिन (3-6 वर्ष) 100 मिग्रा० 1 बार प्रतिदिन है।
निषेध - गर्भावस्था, दुग्धावस्था में औषधि प्रयोग निषेध है। कुछ प्रमुख पेटेण्ट व्यवसायिक उत्पादन
- टेबलेट एलगोरिक (Allgoric) निर्माता-कैमरोन ।
- टेबलेट सिपलोरिक (Ciploric) निर्माता- सिपला
- टेबलेट जायलोरिक (Zyloric) निर्माता-जी०एस० के०
- टेबलेट लोडीरिक (Lodiric) निर्माता-सैव्डोज (नोवारटिस) ।
2. प्रोबेनेसिड (Probenecid)
यह औषधि भी टेबलेट के रूप में विभिन्न पेटेण्ड व्यवसायिक नाम से उपलब्ध है। यह औषधि वृक्कों/ गुर्दों द्वारा मूत्र के माध्यम से यूरिक एसिड के उत्सर्जन को बढ़ाती है। यानि मूत्र द्वारा यूरिक एसिड को बाहर निकालती है। इसका उपयोग - गठिया, गठिया सम्बन्धी जोड़ों की सूजन में किया जाता है। इसकी मात्रा (वयस्कों के लिए) 250-500 मिग्रा० 2 बार प्रतिदिन 7 दिन तक
प्रमुख पेटेण्ट व्यवसायिक उत्पादन
- टेबलेट बेनसिड (Bencid) निर्माता-जेनो।
विशेष - जीर्ण रोगियों में यह औषधियाँ बहुत ही सफल रहती हैं। इस औषधि का विषाक्त प्रभाव भी कम होता है। जीर्ण गठिया (Chronic Gout) रोग में-
- बेनेमिड (Benemid) (यह प्रोबेनेसिड का पेटेण्ट व्यापारिक नाम है।) 0.5 मिग्रा० की ½- ½ टेबलेट दिन में 2 बार 1 गिलास पानी से 14 दिन (2 सप्ताह) तक रोगी को सेवन करायें । तदुपरान्त 1 गोली दिन में 2-3 बार अगले 4 सप्ताह तक दें। साथ सोडाबाईकार्ब (Soda-bi-Carb) 0.6 ग्राम पानी के साथ दिन में 3 बार दें।
औषधि सेवन काल के दौरान गठिया का पुनराक्रमण होने पर 'प्रोबेनसिड' के साथ-साथ 'कोल्चीसिन' 0.5 मिग्रा० भी दिन में 2 बार (सुबह-शाम) दें। सावधानी - प्रोबेनेसिड के उपयोग/सेवन के दौरान सेलिसिलेट्स या पेनिसिलीन का उपयोग/सेवन न करायें ।

