स्कूली बच्चों पर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ के सर्वे में हुआ खुलासा, यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार सूबे में 23,078 बच्चे नेत्रहीन या लोविजन के शिकार
मस्तिष्क ज्वर, हाईफीवर और चेचक से बच्चों की आंखें खराब हो. रही हैं। इन बीमारियों के चलते कई बच्चों की आंखों की रोशनी कम हो गई तो कुछ को बिल्कुल ही दिखाई नहीं दे रहा। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ के सर्वे में यह चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है। बच्चों में लो विजन की समस्या सिर्फ बीमारियों की वजह से ही नहीं आ रही, मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल, प्रदूषण और जंक फूड भी उनकी आंखों की रोशनी छीन रहे हैं।
यू-डायस (यूनाइटेड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) की रिपोर्ट के मुताबिक राज्यभर में कुल 27 हजार 745 स्कूली छात्र और छात्राएं ऐसे हैं, जिन्हें या तो बहुत कम दिखाई देता या फिर पूरी तरह नेत्रहीन हैं। इसमें 23 हजार 78 विद्यार्थी को कम दिखाई देता है। इसमें 11 हजार 987 बच्चों में कम रोशनी की वजह मस्तिष्क ज्वर, हाई फीवर या फिर चेचक की बीमारी है। वहीं, बाकी के 11 हजार बच्चों की आंखों की रोशनी मोबाइल के इस्तेमाल, प्रदूषण और जंक फूड खाने समेत अन्य कारणों से कम हुई है। 4667 बच्चे जन्म से ही नेत्रहीन हैं। ये बच्चें राज्यभर के अलग- अलग स्कूलों में नामांकित हैं।
30 फीसदी अभिभावकों को कारण तक पता नहीं
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ की मानें तो 30 फीसदी बच्चों के अभिभावकों को कम दिखाई देने की वजह का पता तक नहीं है। समय रहते अगर अभिभावकों द्वारा बच्चों का इलाज कराया गया होता तो आंख की रोशनी ठीक हो सकती थी, लेकिन ज्यादातर अभिभावकों को लगा है कि मोबाइल, टीवी देखने के कारण बच्चे की आंख की रोशनी कम हो गयी है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा उन दिव्यांग बच्चों का भी सर्वे
• करवाया गया है, जो अब भी स्कूल के बाहर हैं। ऐसे बच्चों की संख्या 1416 है। इसमें 1143 बच्चे ऐसे हैं जिनके आंख की रोशनी ठीक थी पर मस्तिष्क' ज्वर, हाई फीवर या चेचक होने के बाद आंखों की रोशनी कमजोर हो गयी। वहीं 583 बच्चे जन्मजात नेत्रहीन पाए गए। ये बच्चे आंख की रोशनी कम होने
•या नेत्रहीन होने के कारण स्कूल नहीं जाते हैं। अब बिहार शिक्षा
• परियोजना के प्रयास से इन बच्चों का नामांकन सामान्य स्कूलों में करवाया जा रहा हैं।
ये दिक्कतें हो रही बच्चों को
- कम दिखाई देने से इन बच्चों में आ जाता है चिड़चिड़ापन
- रोशनी कम होने से अकेले कहीं आने-जाने से भी डरते हैं
- ब्लैकबोर्ड सही से दिखे इसके लिए आगे बैठने को झगड़ते हैं
- अंधेरे में या कम रोशनी वाली जगह पर जाने से बचते हैं
- अभिभावकों से डर के चलते बच्चे रोशनी कम होने की बात छुपाते हैं पढ़ाई करने में दिक्कत होती है, अक्षर सही से दिखाई नहीं देता है
बचाव को करें यह काम
- मस्तिष्क ज्वर या तेज बुखार हो तो तत्काल उसका इलाज शुरू कराएं
- बच्चों को नसों की मजबूती प्रदान करनेवाले टॉनिक का सेवन कराएं
(नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार के अनुसार)
