तनाव/ क्रोध पर काबू पाने के आसान तरीके इस प्रकार है :-
- मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह दें। बिना किसी का दिल दुखाऐ।
- विचार करें कि क्या क्रोध करने से सब कुछ सही हो जाएगा।
- जिस समय क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करें।
- सात्विक भोजन करने से क्रोध पर नियन्त्रण हो जाता है ।
- क्रोध की ऊर्जा को नियंत्रित कर उसे रचनात्मक कार्यों की ओर मोड़ा जा सकता है।
- योगाभ्यास द्वारा क्रोध की ऊर्जा को बदला जा सकता है।
- अधिक क्रोध का आवेश हो तो कान की मालिश करें।
- एक तरफा बात सुनकर उत्तेजित ना हों, दोनों पक्षों की बातें सुनकर ही निर्णय लें।
- सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।
- नई पीढ़ी को अपनी पीढ़ी के अनुसार सोचने के लिए मजबूर न करें।
- यह न देखें कि कौन गलत है, बल्कि यह देखें की क्या गलत है।
- क्रोध की संभावना होते ही एक गिलास ठण्डा पानी पीयें तथा विषय को बदलने की कोशिश करें।
- "एक ने कही, दूसरे ने मानी, सभी कहें, दोनों ज्ञानी" यह नीति सभी सम्बन्धों के बीच में आने वाली गुस्सा की सभी स्थितियों के लिए रामबाण औषधि है।
- जिसे बदला ना जा सकें, उसे हंसते-हंसते स्वीकार करें।
- अपने मन के भावों को विस्तार से लिखें।
- होनी को सहर्ष स्वीकार करें और विचार करें कि परमात्मा जो करता या करवाता है, उससे कुछ न कुछ अच्छा अवश्य होता है।
- हँसमुख स्वभाव वाला व्यक्ति क्रोध को सरलता से वश में कर लेता है।
- परितर्वन को अपनायें क्योंकि परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
- क्रोध को जीतने में चुप रहना जितना सहायक करता है, उतनी कोई भी वस्तु नहीं। अतः कुछ समय मौन रहकर आत्म-चिंतन और आत्म-विश्लेषण कीजिए।
- कामनाओं की तीव्र दौड़ से बचें, क्योंकि कामनाओं की पूर्ति में बाधाएं आने पर, क्रोध को बढ़ावा मिलता है।
- परेशानी में एकदम प्रतिक्रिया ना करें।
- याद रखें कि क्या शत्रु आपको गुस्सा दिलाकर आपकी शक्ति को क्षीण तो नहीं कर रहा है या आपके किसी रहस्य को उगलवा रहा है।
- कोशिश करें कि नियमित रूप से ऐसा साहित्य पढ़े जो हमारी शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति में सहायक हों।
- सदा अपनी और दूसरों के गुण देखें।
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